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तहज़ीब हाफ़ी के बेहतरीन शेर व शायरी । Tehzeeb Hafi Shayari, Sher, Poetry in Hindi

 


फरेब दे कर तेरा जिस्म जीत लूँ लेकिन
मैं पेड़ काट के कश्ती नहीं बनाऊंगा।

ये ज्योग्राफिया, फ़लसफ़ा, साइकोलाॅजी, साइंस, रियाज़ी वगैरह
ये सब जानना भी अहम है मगर उसके घर का पता जानते हो ?

पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा 
मैं भीग जाऊँगा छतरी नहीं बनाऊँगा

इक और शख्स छोड़ कर चला गया तो क्या हुआ,
हमारे साथ कौन सा ये पहली मर्तबा हुआ..!

मेरे खिलाफ दुश्मनो की कतार में है वो और मैं,
बहुत बुरा लगूँगा उसपे तीर खींचता हुआ..!

इतना मीठा था वो ग़ुस्से भरा लहजा मत पूछ
उस ने जिस जिस को भी जाने का कहा बैठ गया

आज तो मैं अपनी तस्वीर को कमरे में ही भूल आया हूँ
लेकिन उसने एक दिन मेरा बटुआ चोरी कर लेना है।

तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया 
इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया 


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