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Best 50+ Kabir Das Ke Dohe In Hindi - कवीर दास जी के दोहे

 नहाय धोये से हरि मिले
तो मैं नहाऊं सौ बार
हरि तो मिले निर्मल ह्रदय से प्यारे
मन का मेल उतार

गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय॥

सब धरती काजग करू, लेखनी सब वनराज ।
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाए ।

कबीर
नारी निंदा ना करो,
नारी रतन की खान।
नारी से नर होत है,
ध्रुब प्रहलाद समान।।

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