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बुलंदियों पर शायरी - Bulandi Shayari | Insaniyat Par Shayari

वो बलुंदिया भी
किसी काम की जनाब,
इंसान चढ़े और
इंसानियत उतर जाये.

बुलंदियों पर शायरी - Bulandi Shayari | Insaniyat Par Shayari