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इंसानियत पर शायरी । Insaniyat : Kal, Galat, Aaj, Sahi, Insan, Usul, Jarurat

इंसानियत पर शायरी । Insaniyat : Kal, Galat, Aaj, Sahi, Insan, Usul, Jarurat 
जो कल तक गलत थावही आज के लिए सही बन जाता हैइंसान का हर उसूलउसकी जरुरत के मुताबिकबदल जाता है