Subscribe Us

थोड़ी मस्ती, थोड़ा सा ईमान : Hindi Poem : Masti, Iman, Pehchan, Umeedein, Sapne, Yaadein

थोड़ी मस्ती, थोड़ा सा ईमान
बचा पाया हूँ ।
ये क्या कम है, मैं अपनी पहचान
बचा पाया हूँ।
कुछ उम्मीदें, कुछ सपने,
कुछ महकी-महकी यादें
जीने का मैं इतना ही सामान
बचा पाया हूँ।  

थोड़ी मस्ती, थोड़ा सा ईमान : Hindi Poem : Masti, Iman, Pehchan, Umeedein, Sapne, Yaadein